सोमवार, 19 मई 2008

वजीदा कौण साहिब नूं आखै ...

सूफियों में वजीद मुझे बेहद पसंद हैं- अपनी बेबाकी और स्‍पष्‍टवादिता के कारण। यह सपष्‍टवादिता सर्वशक्तिमान को भी सीधा सवाल दागती है। वजीद ने किस काल में इस पृथ्‍वी पर विचरण किया, निश्‍चित रूप में कुछ नहीं कहा जा सकता। ज्‍यादातर विद्वान इस मत पर सहमत हैं कि उनका समय सोलहवीं-सतरहवीं शताब्‍दी के मध्‍य का समय था। उनकी रचना से मिलते कुछ हवालों से अनुमान लगाया जाता है कि सूफ़ी वेश धारण करने से पहले वह किसी श्रेष्‍ठ फ़ौजी पद पर कार्यरत थे। वजीद की ज्‍यादा रचना श्‍लोकों के रूप में है।

वजीद के श्‍लोक

मूरख नूं असवारी, हाथी घो‍ड़ेयां
पंडित पैर प्‍यादे, पाटे जोड़ेयां
करदे सुघड़ मजूरी, मूरख दे जाए घर
वजीदा कौण साईं नो आखे, एयों नई अंझ कर।
----
गउंआं देंदा घाह, मलीदा कुत्‍तेयां
जागदेयां थीं खोह के देंदा सुत्‍तेयां
चहूं कुंटी है पाणी, तालु, सर ब सर
वजीदा कौण साहिब नो आखै, एयों नई अंझ कर
----

चोर जु करदे चोरी, लिआवण लुट घर।
खांदे दुध मलाई, मलीदे कुट कर।
रहंदे तेरी आस सु, जांदे भुख ‍मरि।
वजीदा कौण साहिब नो आखै, एयों नई अंझ कर।
----

इकना नूं घयो खंड, न मैदा भावई।
बहुती बहुती माया चल्‍ली आवई।
इकना नाही साग, अलूणा पेट भर।
वजीदा कौण साहिब नूं आखै, एयों नई अंझ कर।
----------------------------------------------

सूफ़ी कवि वजीद के बारे में बहुत सारे साथियों की टिप्‍पणियां प्राप्‍त हुईं। ज्‍यादातर दोस्‍तों ने वजीद के श्‍लोकों का हिंदी अनुवाद देने के लिए कहा है। में यहां इन श्‍लोकों की सरल-सी व्‍याख्‍या दे रहा हूं।
श्‍लोक 1 की व्‍याख्‍या
मूर्ख को हाथी-घोड़ों पर सवारी करने के मौके मिलते हैं। पंडित यानी समझदार लोगों को पैदल ही चलने पर मजबूर होना पड़ता है और फटे हुए कपड़ों में ही गुजर-बसर करना पड़ता है। इसी तरह सुघड़ यानी मंजे हुए या समझदार लोगों को मूर्खों के पास जाकर मजदूरी करनी पड़ती है, काम करना पड़ता है। वजीद कहते हैं कि उस साईं को, ख़ुदा को कौन कह सकता है कि वह ऐसा न करके वैसा करे।

श्‍लोक 2 की व्‍याख्‍या
गौओं को घस देता है और कुत्‍तों को मलीदा यानी चूरी खाने के लिए देता है। यही नहीं, जग रहों से छीनकर सोए हुए लोगों को दे देता है। उस साहिब को कौन कह सकता है कि वह ऐसा न करे।

श्‍लोक 3 की व्‍याख्‍या
वजीद इसमें कहते हैं कि चोर चोरियां करते हैं, लोगों को लूटते हैं, दूध मलाई और चूरियां खाते हैं यानी बुरे काम करने पर भी सबसे अच्‍छा जीवन व्‍यतीत करते हैं। लेकिन जो तुम्‍हारी यानी भगवान पर विश्‍वास रखते हैं, वे भूखे मरते हैं। वजीद कहते हैं कि ऐसा करने पर भी कौन उस साहिब को, उस परमात्‍मा को कह सकता है कि वह ऐसा न करे।

श्‍लोक 4 की व्‍याख्‍याइस श्‍लोक में वजीद कह रहे हैं, दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्‍हें खाने के लिए घी, शक्‍कर और मैदे से बनी अच्‍छी-अच्‍छी वस्‍तुएं मिलती हैं, लेकिन वह उन पर भी नाक-भौं सिकोड़ते हैं। परंतु दूसरी तरफ़ ऐसे भी लोग हैं, जिन्‍हें पेट भरने के लिए अन्‍न का एक दाना भी नसीब नहीं होता। ऐसे में भी उस साहिब को कौन कह सकता है कि वह ऐसा न करे।

12 टिप्‍पणियां:

हरिमोहन सिंह ने कहा…

अगर इसका हिन्‍दी अनुवाद भी मिल जाता तो सोने में सुहागा होता जी

Udan Tashtari ने कहा…

वाकई हिन्दी अनुवाद मिल जाये तो ठीक/

Jaggi ने कहा…

Kia baat hai Navraahi Ji...Bahut khoob..!!

Aap ka dost,
Shivcharan Jaggi Kussa
jaggikussa65@hotmail.com

सुभाष नीरव ने कहा…

वजीदा के श्लोक बगैर हिन्दी अनुवाद के भी अपना अर्थ बखूबी दे रहे हैं। फिर भी यदि उनके अर्थों तक पहुंचने में मुश्किल आ रही है तो नवराही जी आप भावार्थ दे दें। ऐसी रचनाओं का वास्तव में अनुवाद करना कोई सरल काम नहीं है। "कुंज गली" का ब्लाग की दुनिया में स्वागत है।

रंजू ranju ने कहा…

कुछ कुछ समझ आया .:)..इसके हिन्दी अनुवाद के साथ यदि बुल्ले शाह की कोई रचना आप यहाँ सुना सके तो बहुत अच्छा लगेगा ...

सुनीता शानू ने कहा…

अच्छा लगा पढ़ कर... इश्वर का लिखा कौन मिटा सकता है...कई बार कितना ही अच्छा कर्म किया जाये फल अच्छा नही मिल पाता और कुछ लोगो को बिना कुछ किये अच्छे फ़ल की प्राप्ति हो जाती है...ऎसे में यही कहा जा सकता है कि परमात्मा को कौन कुछ कह सकता है...

renu ahuja ने कहा…

Ni sandeh Sufi sahitya key sandesh hriday key antartal ko chhoo letey hain,
khudaa ki ibaadat , aur oski razaa mey reh kar oosee ki chaahat, ka khoobsurat nazaraa pesha kartaa aapka ye sankala kabiley taarif hai.
KUNJ GALI ka swagat hai.
-renu.

shabdaa-di-loa GAZAL ने कहा…

SAAHIB MULTYNATIONAL COMPANIESSSS KO KAUN KAHEY KI YOON NHI YOON KRO...1

The Evils Of Cola
Peter Liu
We know it’s bad for us, but can cola kill?

Cola is a beverage many of us have been familiar with since we were young. Cola manufacturers have been quenching our thirsts and filling our minds with advertising for decades. Billions of cans of cola are sold around the globe each year, with cola flowing like water in many industrialized countries. To that end, it’s not a real wonder that cola can effectively kill you if drunk in excessively large amounts, especially since a new medical study has laid out just how bad cola can be, for people who can’t get enough of it. One assumes at this point that the prudent thing to do would be to simply drink less cola, at least until the next time one is bombarded by cola advertising.
CONTD…

shabdaa-di-loa GAZAL ने कहा…

Quenching Details.

Published in the June issue of the International Journal of Clinical Practice is a new study out of the Department of Internal Medicine at the University of Ioannina, Greece. Dr. Moses Elisaf and his fellow researchers reviewed the types of symptoms that could occur in people who drank anywhere from two litres to nine litres of cola per day, going over the case studies of patients who qualified. In one such study, a 44-year-old ostrich farmer was afflicted by lung paralysis as well as muscle weakness to the point of having trouble standing up. This was due to the four litres of cola he had been drinking every day for the past three years, up to 10 litres sometimes just to quench his thirst while out hunting. Another case study highlighted a 51-year-old man with chronic pulmonary disease, hypertension, muscle weakness and loose bowel issues several times a day. Doctors couldn’t figure out why he was experiencing his symptoms until they found out the man continuously sipped up to four litres of cola every day.
CONTD.2

shabdaa-di-loa GAZAL ने कहा…

CONTD 3
Stomach Churning Issues

Regardless of its branding, cola drinks have always been taken for granted as one of the most abundant sources of sugary, teeth-rotting beverages found on earth. Now the University of Ioannina study suggests that excessive over consumption of cola drinks can cause not only tooth decay, but also diabetes, cardiovascular disease, bone demineralization and hypokalemia, which is low blood potassium levels caused by extreme cola over consumption. Hypokalemia is the main cause behind the muscle problems experienced by people who drink too much cola. Muscle weakness can be anywhere from mild to paralysis

shabdaa-di-loa GAZAL ने कहा…

CONTD... 4
More To Avoid

This study into the dangers of cola over consumption singled out the three most common ingredients responsible for most of the health issues related to drinking cola, which, unsurprisingly, were glucose, fructose and caffeine. Seeing as how health professionals are always advising people to reduce their intake of those three anyhow, lowering cola intake could be beneficial in the long run, but how does one avoid the stormy seas of cola?

Moderation

Even though the University of Ioannina study focused on extreme cases of cola over consumption, the issue is largely ignored everywhere else. Restaurants and stores continue to sell cola beyond the average 355 ml can in different forms of packaging that encourage over consumption. The well-known plastic 2 litre cola bottles, as well as 7/11’s Big Gulp cup size are just two examples that can easily lure the average person into drinking too much cola.

shabdaa-di-loa GAZAL ने कहा…

CONTD...5


Just Say No

The majority of convenience stores, restaurants and fast food joints all serve cola in one incarnation or another, and one should be wary. In restaurants, it’s simple to just order a different drink. In fast food chains cola is the standard they expect you to drink unless you specifically order something else. Don’t forget that used to be a medium-sized drink container is now the small-sized container in Wendy’s chain restaurants. In stores, it’s simple to walk past the rows of aluminum cans in favour of a healthier drink, provided you can avoid any other processed beverage that doesn’t contain glucose, fructose or caffeine.

Cutting Back

Committing to reducing your intake of cola, imitation colas and zero-calorie colas can be challenging, especially if you’re used to drinking more than one per day. Drinking less cola would certainly go a ways towards improving your overall health, but if and when you do toss back that coke, make sure you enjoy it!


Sources:
The International Journal of Clinical Practice
BBC